त्रिफला चूर्ण के फायदे, सही अनुपात और सेवन विधि (Triphala churna ke fayde hindi mein)

त्रिफला- तीन फलों से मिलकर बना तीनों दोषों का नाशक।

त्रिफला चूर्ण  प्रसिद्द आयुर्वेदिक औषधि है। आयुर्वेद के 5,000 से भी ज्यादा लम्बे- चौड़े इतिहास में त्रिफला चूर्ण का उपयोग अनेकों बिमारियों के निवारण के लिए किया जाता रहा है। अगर आप आयुर्वेदिक जड़ी- बूटियों  इस्तेमाल करते हैं तो आप त्रिफला के बारे में जरूर जानते होंगे।

आमतौर पर त्रिफला का इस्तेमाल कब्ज दूर करने वाली के रूप में किया जाता है और कुछ हद तक लोग नेत्र रोगों के इलाज के रूप में भी त्रिफला को जानते हैं। लेकिन इतना काफी नहीं है क्योंकि त्रिफला चूर्ण तो आयुर्वेद में शरीर के कायाकल्प कर देने वाले रसायन के नाम से प्रसिद्द है।

इस लेख में हम बात करेंगे त्रिफला चूर्ण के फायदे और नुकसान (Triphala churna ke fayde hindi mein) त्रिफला चूर्ण खाने की विधि, त्रिफला चूर्ण के सही अनुपात के बारे में।  त्रिफला चूर्ण आयुर्वेद में वर्णन किये गए त्रिदोषों को दूर करता है। अन्य महत्वपूर्ण जानकारी से पहले हम त्रिफला क्या है तथा आयुर्वेद में इसके महत्व के सम्बन्ध में चर्चा शुरू करते है।

त्रिफला क्या होता है ?

त्रिफला चूर्ण एक बहुत ही प्रसिद्ध आयुर्वेदिक रसायन है जो तीन जड़ी- बूटियों के मिश्रण से तैयार किया जाता है। त्रिफला (त्रि + फला) अर्थात जो 3 फलों से मिलकर बना है।(1)

त्रिफला चूर्ण इन तीन जड़ी- बूटियों से मिलकर बना है :-

आंवला

आंवला विटामिन C का सबसे अच्छा स्रोत है और अनेकों खनिज पदार्थों, फाइबर ओर एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर है। आंवले का सेवन शरीर को ऊर्जावान रखता है और कब्ज के साथ पेट की अनेकों बीमारियों से दूर रखता है। आंवले में एन्टी-एजिंग गुण पाए जाते हैं जो बढ़ती उम्र में भी आपको जवान बनाये रखते है।(2)

बहेड़ा या विभितकी

सम्पूर्ण भारत मे पाया जहर वाला बहेड़ा एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है। बहेड़ा आयुर्वेद में दर्द निवारक, सांस सम्बन्धित रोगों में फायदेमंद, लिवर और डायबिटीज के रोग में राहत देने वाला पौधा है। यह अनेकों एंटीऑक्सीडेंटस से भरपूर है।(3)

हरड़ या हरीतकी

औषधियों का राजा कहे जाने वाला हरड़ हरीतकी या हर्रे नाम से भी जाना जाता है। हरीतकी एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ी- बूटी है जो हृदय, लिवर, मूत्राशय ओर पेट सम्बन्धित रोगों के इलाज में फायदेमंद है। यह एंटीऑक्सीडेंटस से भरपूर है और घाव को जल्दी सही करने में बहुत मदद करती साथ ही सूजन को भी कम कर देती है।(4)

त्रिफला चूर्ण इन तीन फलों से मिलकर बना है। ये तीनों फल बहुत ही विशिष्ट है और इनसे मिलकर बना त्रिफला चूर्ण त्रिदोष नाशक है। लेकिन विभिन्न बिमारियों में इसका सेवन चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।

त्रिफला चूर्ण के फायदे और नुकसान (Triphala churna ke fayde hindi mein)

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कब्ज दूर करने में त्रिफला चूर्ण के फायदे (Triphala for Constipation in Hindi)

पेट की बीमारी आगे चलकर कई और बीमारियों का कारण बन सकती है। आयुर्वेद के अनुसार कब्ज़ बहुत सारी दूसरी बीमारियों की जड़ है जैसे बवासीर, भगंदर आदि।

त्रिफला अपने जीवणुरोधी (antibacterial) गुणों कर लिए जाना जात है जिसकी वजह से हमारा पाचन तंत्र अच्छा रहता है।(5)

कब्ज से छुटकारा पाने के लिए त्रिफला सबसे अच्छी औषधि है। त्रिफला पुराने से पुराने कब्ज को भी सही कर सकता है। इसके आलावा त्रिफला पेट से सम्बंधित अन्य कई परेशानियों में भी राहत देता है।(6)

उपयोग विधि

  • रात को सोने से पहले लगभग 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण को पानी या दूध के साथ लेने से कब्ज दूर हो जाएगा।
  • इसके अलावा कब्ज दूर करने के इसबगोल और त्रिफला चूर्ण को मिलाकर गुनगुने  पानी के साथ ले भी ले सकते हैं।

त्रिफला के फायदे वजन कम करने के लिए (Triphala for Weight Loss in Hindi)

क्या आप किसी डाइट या एक्सरसाइज को किये बिना वजन कम करना चाहते हैं? अगर हाँ तो इसका सबसे अच्छा तरीका है त्रिफला। आयुर्वेद के अनुसार त्रिफला में कुछ ऐसे गुण पाए जाते हैं जो आपके शरीर की पाचन शक्ति को बढ़ाकर वजन को कम करने में मदद करते हैं।

त्रिफला वजन कम करने के लिए सबसे अच्छी औषधियों में से एक है। त्रिफला पाचन तंत्र को मजबूत करता है। कई लोगों को पाचन तंत्र में दिक्कतें होती है। वे जो भी खाते हैं वह पचता नहीं है और वे भूखा महसूस करते इसलिए बार- बार कुछ न कुछ खाते रहते और यही आदत धीरे- धीरे वजन बढ़ने का कारण बनती है।

त्रिफला आपके शरीर की बड़ी आंत में पाए जाने वाले कॉलन के लिए बहुत ही अच्छा है। त्रिफला के उत्तकों (Tissues) साफ करता है और मजबूत करने में  है जिससे वजन नियंत्रण करने में सहायता मिलती है।

त्रिफला एक ऐसा रसायनिक मिश्रण है जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बड़ी ही सरलता से निकाल देता है। इसलिए शरीर में अतिरिक्त फैट जमा नहीं होता। 

त्रिफला पाचन को ठीक करके भूख को बढ़ाता है साथ ही लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में भी बढ़ोतरी करता है।

उपयोग विधि

त्रिफला को शहद के साथ लेने वजन कम करने में सहायता मिलती है।

त्रिफला से आँखें धोने के फायदे (Triphala Powder for Eyes in Hindi)

त्रिफला से आँख धोना, आँखों की दृष्टि और बीमारियों को ठीक करने में फायदेमंद है। त्रिफला मोतियाबिंद, आँख आने और ग्लूकोमा जैसी बीमारीयों का शुरुआती चरण में ही ईलाज करने में सक्षम है।

त्रिफला के उपयोग से आंखों का लाल होना, आँखों की जलन, नज़र कमजोर होना जैसी सभी तकलीफें दूर होती है और आँखों की मासपेशियां मजबूत होती है।

उपयोग विधि

  • इसके लिए मिट्टी, कांच या तांबे के पात्र में एक या दो चम्मच त्रिफला चूर्ण को रात भर ठंडे पानी में भिगोकर रख दें। अगले दिन सुबह इस त्रिफला वाले पानी को छानकर इस पानी से आँखें धोएं।
  • नियमित तौर पर त्रिफला के जल से आँखें धोने से आँखों की रोशनी बढ़ती है और ऊपर बताये गए रोगों में भी फायदा होता है।

त्रिफला चूर्ण बालों का झड़ना रोकता है

आजकल बहुत से लोगों को कम उम्र में ही बालों का पतला होना बाल झड़ने सफेद होने और गंजेपन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। झड़ते बालों को बचाने के लिए आज कल के युवा न जाने क्या क्या नुस्के और तरीके आजमाते रहते हैं लेकिन फिर भी परेशानी वैसी की वैसी ही बनी रहती है।

आयुर्वेद में बाल झड़ने की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए बहुत से अचूक उपाय बताए गए हैं उन्हीं में से एक है त्रिफला।

त्रिफला विटामिन सी से भरपूर होता है जिससे यह बालों के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक है। त्रिफला के रक्त शोधक गुणों के कारण यह बालों में नई जान डाल देता है।

त्रिफला में लगभग 50% मात्रा तो आंवले की ही होती है इसलिए यह बालों को काला रखने के लिए भी उपयोगी है। आइये जानते हैं त्रिफला का उपयोग कैसे करें।

उपयोग विधि

  • त्रिफला के चूर्ण को भिगोकर बालों में लगा लें और लगभग आधे से 1 घंटे बाद धो लें। त्रिफला का पेस्ट लगाने से बाल मजबूत होते हैं और बहुत जल्दी सफेद नहीं होते।
  • बालों को पोषण देने के लिए सप्ताह में दो बार त्रिफला के तेल की मालिश भी की जा सकती है। 
  • बालों को झड़ने से रोकने के लिए दो से पांच ग्राम की मात्रा में त्रिफला चूर्ण लेंगे और इससे लगभग 125 एमजी लौह भस्म उसके साथ मिलाकर रोज़ सुबह शाम दिन में दो बार इसका सेवन करें। अगर लौह भस्म उपलब्ध नहीं हो तो त्रिफला का नियमित सेवन करें और हाँ आयरन की कमी के लिए आयरन की गोली भी ले सकते हैं।
  • आजकल बाजार में त्रिफला टैबलेट भी मौजूद है इसका भी सेवन किया जा सकता है। लेकिन घर पर तैयार किए गए त्रिफला चूर्ण का उपयोग सर्वोत्तम हैं।

पाचन तंत्र को मजबूत कर पाचनशक्ति बढ़ाता है त्रिफला चूर्ण

कमजोर पाचन शक्ति से बहुत सारी अन्य बीमारियां पनपने लगती है। जब हमारे शरीर की पाचन क्रिया कमजोर होती है तो खाया गया भोजन पचता नहीं है और शरीर में पड़े- पड़े ही सड़ने लगता है जिससे हमें आंव और मरोड़े की शिकायत होती है। 

आंव दोष कोई सामान्य दोष नहीं है। आंव एक वात दोष है जिसके कारण शरीर में जकड़न और सूजन तथा जोड़ों में दर्द बना रहता है। 

त्रिफला आंव दोष को मिटाता है। त्रिफला हमारे शरीर में मौजूद आँतों की सफाई करता है और शरीर से गंदगी निकालकर शरीर को डिटॉक्स करता है। इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और पाचन शक्ति बढ़ती है।

उपयोग विधि

रात को सोने से पहले एक चम्मच त्रिफला चूर्ण और दूध का सेवन करना चाहिए।

दांतों को मजबूत रखने में त्रिफला के फायदे

त्रिफला में एंटी माइक्रोबियल और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो मुँह में बैक्टीरिया पनपने से रोकते है।

इसके अलावा दांतों से जुड़ी अन्य समस्याओं जैसे दाँत में कीड़ा लगना, मसूड़ों से खून आना, मसूड़ों में सूजन और दर्द या मुँह की बदबू जैसी परेशानियों में भी त्रिफला चूर्ण बहुत फायदेमंद है। त्रिफला में मौजूद एंटी कैरिज गुण दंत क्षय से बचाव करने में लाभकारी है।

उपयोग विधि

  • ओरल हेल्थ से संबंधित परेशानियों में त्रिफला चूर्ण को पानी में रातभर भिगोकर रख दें और फिर इससे सुबह कुल्ला करें। त्रिफला को माउथ वॉशर की तरह प्रयोग किया जा सकता है। यह दांतों को मजबूत करता है, दर्द में आराम देता है और मसूड़ों के संक्रमण से छुटकारा दिलाता है।
  • अगर मुँह में बदबू आती है तो आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण में शहद मिलाकर चाटने से बहुत हद तक मुँह की दुर्गंध से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके अलावा आप एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को गर्म पानी में मिलाकर उस से गरारे भी कर सकते हैं।

त्रिफला के फायदे त्वचा के सौंदर्य में

त्वचा से संबंधित बहुत सारी समस्याओं का समाधान करने में और त्वचा को एक प्राकृतिक चमक देने में त्रिफला चूर्ण का बहुत बड़ा योगदान है। त्रिफला में रक्त शोधक गुण पाए जाते हैं जिससे त्वचा की रंगत निखर जाती है।

त्रिफला मृत कोशिकाओं को हटा कर त्वचा के रोमछिद्रों को साफ करता है। त्रिफला त्वचा पर पड़ने वाले चितकों, मुँहासों या निशान आदि के इलाज में फायदेमंद है यह रक्त को साफ कर त्वचा को प्राकृतिक चमक देता है।

त्रिफला में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो त्वचा की झुर्रियों को खत्म करता है और त्वचा से रूखापन भी हटाता है।

त्रिफला में मौजूद आंवला कोलेजन का निर्माण करता है और बहेड़ा स्किन पिगमेंटेशन मैं सहायक है।

उपयोग विधि

  • कहते हैं की जो हम खाते हैं उसकी झलक हमारी त्वचा पर भी पड़ती है इसलिए अच्छी त्वचा के लिए सुबह खाली पेट एक चम्मच त्रिफला चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करना चाहिए। 
  • त्रिफला को शहद के साथ मिलाकर त्वचा पर भी लगाया जा सकता है। 

त्रिफला चूर्ण और दूध के फायदे

आयुर्वेद में त्रिफला चूर्ण और दूध का सेवन रात को करने से पेट से सम्बंधित रोगों और परेशानियों से छुटकरा मिलता है।

दूध के साथ त्रिफला चूर्ण के फायदे

  • रात को त्रिफला चूर्ण और दूध का सेवन करने से पेट साफ़ होता है और पेट में होने वाली जलन भी कम होती है।
  • दूध के साथ त्रिफला चूर्ण रेचक का काम करता है और कब्ज, एसिडिटी और अन्य पेट की समस्याओं में राहत देता है।
  • दूध के साथ त्रिफला चूर्ण सामान फायदेमंद है, लेकिन जो लोग त्रिफला को दूध के साथ नहीं लेना चाहते वे इसे गुनगुने पानी के साथ भी ले सकते हैं।

त्रिदोष नाशक औषधि है त्रिफला

अगर आप वात, पित्त कफ का घरेलू उपचार करना चाहते हैं तो आपको त्रिफला का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि त्रिफला एक त्रिदोष नाशक औषधि है।

आयुर्वेद में मुख्यतः तीन प्रकार के दोषों के बारे में बताया गया और वे तीन दोष हैं वातपित्त और कफ

वास्तव में आयुर्वेद में ऐसी अनेकों औषधियां है जो वात, पित्त और कफ के निदान के लिए प्रयोग की जा सकती है लेकिन कितना अच्छा हो अगर तीनों दोषों को दूर करने के लिए एक ही औषधि मिल जाए। तो चलिए शुरू करते हैं त्रिफला की चर्चा।

वाग्भट जो आयुर्वेद के सबसे प्रभावशाली शास्त्रीय लेखकों में से एक है ने अपनी पुस्तक में त्रिफला को तीनों दोषों (वात, पित्त और कफ) के लिए एक असरदार औषद्धि बताया है और केवल त्रिफला पर ही इन्होने 120 से अधिक सूत्र लिखें हैं।

त्रिफला तीन फलों से मिलकर बना है 1. आंवला, (2.) बहेड़ा, (3.)हरड़ । आयुर्वेद में यह तीनों फल अमलकीविभीतक और हरितकी के नाम से जाने जाते हैं और यही वह 3 आयुर्वेदिक औषधीय है जो तीनों प्रकार के दोषों (वात, पित्त और कफ) के निदान में सक्षम है।

इसलिए वाग्भट जी ने इन तीनों फलों को सर्वोत्तम फल की संज्ञा दी है। इनमें भी सर्वोत्तम फल आंवला है उसके बाद बहेड़ा और फिर हरड़ । लेकिन जरा रुकिए क्योंकि इस औषधि में इन फलों का सही मात्रा में प्रयोग परम आवश्यक है जो कि निम्नलिखित है-

त्रिफला चूर्ण बनाने का अनुपात (Triphala ka anupat)

त्रिफला चूर्ण बनाने की विधि बताएं

  • त्रिफला में तीनों फलों का प्रयोग 1 : 2 : 3 के अनुपात में किया जाना चाहिए। यह त्रिफला में प्रयोग की गई सर्वउपयुक्त मात्रा है ।
  • 1के अनुपात में हरड़, 2 के अनुपात में बहेड़ा और 3 के अनुपात में आंवला। मतलब अगर आप 100 ग्राम हरड़ का प्रयोग करते हैं तो बहेड़ा की मात्रा 200 ग्राम और आंवला की मात्रा 300 ग्राम होनी चाहिए।
  • कुछ गंभीर बिमारियों (जैसे- कैंसर और रेडिएशन से सम्बंधित बीमारियों) में आंवला, बहेड़ा और हरड़ के मिश्रण का अनुपात समान भी रखा जाता है।
  • सामान्यतः इसे 1 : 2 : 3 के अनुपात में ही प्रयोग करना चाहिए। तो चलिए त्रिफला रसायन के  सेवन के संबंध में कुछ बातें करते हैं ।

त्रिफला चूर्ण कब और कैसे खाना चाहिए, त्रिफला चूर्ण खाने का तरीका

रात में त्रिफला चूर्ण के फायदे

  • रात में इसका सेवन पेट की सफाई के लिए किया जाता है, बड़ी आंत की सफाई के लिए किया जाता है । वाग्भट जी ने इसके लिए रेचक शब्द का प्रयोग किया है। अर्थात शरीर के अंगों की सफाई करने वाला।
  • अगर आप त्रिफला चूर्ण कब्ज के लिए लेना चाहते हैं तो आपको त्रिफला का सेवन रात को करना चाहिए। यह कब्ज की समस्या दूर करता है और पुरानी से पुरानी तकलीफ को भी हमेशा के लिए समाप्त करता है।

सुबह त्रिफला चूर्ण के फायदे

  • दिन में इसका सेवन शरीर को पोषण प्रदान करने के लिए किया जाता है। वाग्भट जी ने इसके लिए पोषक शब्द का प्रयोग किया है।
  • अगर आप एक स्वस्थ व्यक्ति हैं और किसी प्रकार की बीमारी से ग्रस्त नहीं है तो आपको इसका सेवन सुबह के समय गुड़ या शहद के साथ करना चाहिए।
  • सुबह के समय इसका प्रयोग करने से शरीर में विटामिन्स, कैल्शियम, आयरन, माइक्रो नुट्रिएंट्स आदि की पूर्ति होती हैं।

त्रिफला चूर्ण और मोटापा

मोटापा घटाने के लिए आयुर्वेदिक चूर्ण त्रिफला बहुत ही फायदेमंद है। अगर आप मोटापे की समस्या से ग्रस्त है तो आपको इसका सेवन सुबह के समय करना चाहिए। यह आपके शरीर की चर्बी को समाप्त कर शरीर को संतुलन प्रदान करेगा ।

बवासीर में त्रिफला चूर्ण के फायदे

पाचन में गड़बड़ी होने से बवासीर और भगन्दर जैसी और भी समस्याएं हो सकती है। त्रिफला के नियमित सेवन से मल त्याग में आने वाली दिक्कत दूर हो जाती है। त्रिफला से गुदा और गुदाशय की नसें भी मजबूत होती हैं। 

त्रिफला के नियमित सेवन से कब्ज और पेट सम्बन्धी विकार भी समाप्त होते हैं। बवासीर में त्रिफला खाने से फायदा होता है और यह कई प्रयोगों द्वारा प्रमाणित भी हो चूका है।(1)

बवासीर और उसके इलाज के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़ें।

कुछ विशेष परिस्थितियों में त्रिफला चूर्ण खाने की विधि (triphala churna khane ki vidhi)

  • वे लोग जो पेट से सम्बंधित बिमारियों जैसे कब्ज, बवासीर, भगन्दर, मूलव्याध (पाईल्स/ Hemorrhoid) से ग्रसित हैं तो उन्हें त्रिफला का सेवन रात को भोजन के बाद दूध या गरम पानी के साथ करना चाहिए।
  • वे लोग जो पेट के अलावा अन्य बिमारियों से ग्रस्त हैं या वजन कम करना (मोटापा कम करना) कहते हैं, उन्हें इसका सेवन सुबह खाली पेट (भोजन से पहले) शहद या गुड़ के साथ करना चाहिए।
  • वे लोग जो स्वस्थ हैं अगर त्रिफला का सेवन करना चाहते हैं तो उन्हें इसका सेवन केवल सुबह ही करना चाहिए।
  • जो लोग डायबिटीज (diabetes) से ग्रस्त हैं वे भी सुबह गुड़ के साथ त्रिफला का सेवन कर सकते हैं। इससे कोई समस्या नहीं होगी क्योंकि जिस प्रकार फलों में पाई जाने वाली शुगर Fructose श्रेणी में आती हैं गुड़ की शुगर भी उसी श्रेणी की हैं, जो सरलता से digest हो जाती हैं और शरीर को नुकसान नहीं पहुँचाती।

जो लोग त्रिफला का सेवन नहीं करना चाहते या नहीं कर सकते, वे क्या करें?

जो लोग त्रिफला का सेवन नहीं करना चाहते या नहीं कर सकते वे इसके स्थान पर आंवले का सेवन कर सकते हैं  इससे भी उन्हें काफी फायदा मिलेगा क्योंकि त्रिफला में प्रयोग किए गए मिश्रण का 50% हिस्सा आंवला का ही है 

वैज्ञानिकों के द्वारा किये गए एक शोध में भी आंवले को सम्पूर्ण विश्व में सबसे बेहतरीन एन्टिओक्सीडेंटल फल बताया गया हैं। मतलब इसके सेवन से हमारे शरीर में ऑक्सीडेशन की क्रिया मंद पड़ जाती हैं। ऑक्सीडेशन ही वह प्रक्रिया हैं जिससे हमारा शरीर वृद्ध होने लगता हैं।

आंवले का सेवन आपको जल्दी वृद्ध नहीं होने देता। आँवले को च्यवनप्राश के प्रधान द्रव्य के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।

त्रिफला चूर्ण कितने दिन खाना चाहिए ?

अगर आप त्रिफला का नियमित सेवन करते हैं तो आपको 3 महीने के बाद 15 – 20 दिन का विराम देना चाहिए और फिर 3 महीने के लिए इसका प्रयोग करने के बाद 15 – 20 दिन का विराम देना चाहिए।

क्योंकि वाग्भट जी के अनुसार इसका लगातार सेवन करने से शरीर में कमजोरी महसूस हो सकती हैं और शरीर के लिए नुकसान दायक हो सकता हैं।अतः 3 महीने के बाद कुछ दिनों का विराम अवश्य दें।

त्रिफला किस मात्रा में सेवन करना चाहिए?

  • प्रति दिन 1 बड़ी चम्मच त्रिफला चूर्ण का सेवन करना चाहिए।
  • जो लोग वजन कम करना चाहते हैं और त्रिफला का सेवन नहीं कर सकते वे इसके स्थान पर 3 -4 आंवले प्रति दिन खा सकते हैं।

त्रिफला चूर्ण के नुकसान

  • 6 साल से काम उम्र के बच्चों को त्रिफला चूर्ण नहीं देना चाहिए। 
  • गर्भावस्था और उसके बाद बच्चे को स्तनपान कराने के दौरान महिलाओं को त्रिफला चूर्ण का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • त्रिफला का बहुत ज्यादा मात्रा में सेवन करने से डायरिया (Diarrhea) होने या पेट दर्द होने की संभावना है। 
  • त्रिफला के बहुत ज्यादा सेवन से अनिद्रा की शिकायत भी हो सकती है।
  • डायबिटीज में त्रिफला का सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। 

बेस्ट त्रिफला चूर्ण

इस लेख को पढ़ने से पहले शायद आपने सर्च  डाबर त्रिफला चूर्ण कैसे खाएं या पतंजलि त्रिफला चूर्ण खाने का तरीका या फिर अन्य कोई ब्रांड का त्रिफला चूर्ण देखा होगा। आप जानना चाहते होंगे कि सबसे बेस्ट त्रिफला चूर्ण कौनसा है और वह त्रिफला चूर्ण कहां मिलेगा। 

लेकिन बहुत सी बिमारियों में त्रिफला चूर्ण का अनुपात अलग- अलग होता है। इसलिए बेहतर तो यही होगा कि आप पंसारी की दुकान से सूखा आंवला, बहेड़ा और हरड़ लेकर उसे अच्छी तरह पीस लें और किसी वैद्य की सलाह से तीनों फलों को सही अनुपात में मिला लें। बाजार से लाया गया त्रिफला चूर्ण  किस अनुपात में मिश्रित किया गया है इसकी जानकारी होना जरुरी है।

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